Friday, February 18, 2011

कहाँ गये पेड़ों के रक्षक?


पूनम श्रीवास्तव जी की एक कविता प्रकृति के लिये..............

आज धरा है हमसे पूछती
 क्यों प्रकृति लगती खाली?
जहाँ कभी थे झूमते पेड़
और चहुँदिशि थी हरियाली।

जो हमको जीवन देते,
उनकी जान ही खतरे में डाली।
कहाँ गये पेड़ों के रक्षक?
कहाँ खो गये वन-माली?

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर कविता...शिक्षाप्रद.
    ______________________________
    'पाखी की दुनिया' : इण्डिया के पहले 'सी-प्लेन' से पाखी की यात्रा !

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  2. बहुत बढ़िया प्रेरक रचना ...आभार

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  3. एक अर्थ में हम सब पूर्व-कालिदास हैं।

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  4. बहुत बढ़िया रचना ...

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  5. प्रेरणादायी रचना !

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  6. वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर....SHUBHKAAMANYEN !
    ek sunder prastuti hetu पूनम श्रीवास्तव जी ka abhaar

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  7. सुन्दर संदेशपरक कविता

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  8. bahut bahut hardik dhanyvaad aapka meri
    rachna ko apne blog par post karne ke liye .
    is shubh kary ki shuruvaat ham sabhi ko milkar karni hogi apni vasundhara ko fir se vrixhon se bharpur -va hara bhara dekhne ke liye.
    ek bar punah dhanyvaad----
    poonam

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  9. सुन्दर संदेशपरक कविता

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  10. इसका जिम्मेद्वार पूर्ण रूप से सरकारी नीतियाँ, शहरीकरण तथा औद्योगीकरण है. इसके लिए हमें मिल के प्रयास करना होगा
    बधाई इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिये

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  11. कहाँ गये पेड़ों के रक्षक?
    कहाँ खो गये वन-माली?sahi n stik bat.

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